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सुरेख!

जुणं घर आपल्याला म्हणतं-

तू जो आए तो इस घर को संवरता देखूं एक मुद्दत से जो विरां है,वो बसता देखूं

आणि ते घर सोडून जाताना आपल्याला वाटतं-

वो दास्तां जो हमने कही भी, हमने लिखी आज वो खुद से सुनी है, नहीं उदास नहीं

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